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रबी फसलों का MSP बढ़ा: गेहूं 2,610 रुपये क्विंटल, कुसुम में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

केंद्र ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए छह फसलों का MSP बढ़ाया। गेहूं 25 रुपये बढ़कर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल, कुसुम में सबसे ज्यादा 675 रुपये की बढ़ोतरी।

हरियाणा में गेहूं की हरी फसल से लहलहाता खेत (प्रतीकात्मक तस्वीर)
प्रतीकात्मक तस्वीर। फ़ोटो: Aman Rania / विकिमीडिया कॉमन्स (CC0)

केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए सभी छह अनिवार्य रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 30 सितंबर को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में यह फैसला लिया गया। गेहूं का MSP 25 रुपये बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है, जो 2026-27 में 2,585 रुपये था।

फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी दाम दिलाना है। उन्होंने बताया कि गेहूं की उत्पादन लागत 1,264 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि MSP इससे दोगुने से भी ज्यादा रखा गया है।

किस फसल का कितना बढ़ा दाम

सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम (सैफ्लावर) में हुई है, जिसका MSP 675 रुपये बढ़कर 7,215 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। रेपसीड-सरसों का MSP 413 रुपये बढ़कर 6,613 रुपये और मसूर का 390 रुपये बढ़कर 7,390 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। जौ का MSP 136 रुपये बढ़कर 2,286 रुपये और चना का 83 रुपये बढ़कर 5,958 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है।

सरकार के अनुसार उत्पादन लागत पर सबसे ज्यादा 106 प्रतिशत मार्जिन गेहूं में रहेगा। इसके बाद रेपसीड-सरसों में 96 प्रतिशत, मसूर में 92 प्रतिशत, चना में 59 प्रतिशत, जौ में 58 प्रतिशत और कुसुम में 50 प्रतिशत मार्जिन का अनुमान है। सरकार ने कहा है कि यह बढ़ोतरी 2018-19 के केंद्रीय बजट की उस घोषणा के मुताबिक है, जिसमें MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत का कम से कम डेढ़ गुना तय करने की बात कही गई थी।

दलहन और तिलहन पर जोर

इस बार गेहूं की तुलना में दलहन और तिलहन फसलों के दाम में कहीं ज्यादा बढ़ोतरी की गई है। सरकार का कहना है कि इससे किसानों को दलहन और तिलहन की खेती की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

पीटीआई के अनुसार, 2027-28 विपणन वर्ष में करीब 324 लाख टन खरीद पर किसानों को लगभग 90,962 करोड़ रुपये के भुगतान का अनुमान है। रबी फसलों की बुवाई आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर में शुरू होती है, इसलिए बुवाई से पहले घोषित ये दाम किसानों के लिए फसल चुनने में अहम माने जाते हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर। फ़ोटो: Aman Rania / विकिमीडिया कॉमन्स (CC0)

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