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UPI पर 15 अक्टूबर से MDR का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ व्यापारी UPI भुगतानों पर 0.4% MDR पर अंतरिम रोक से इनकार किया। ग्राहकों और व्यक्ति-से-व्यक्ति ट्रांसफर पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की इमारत का गुंबद और उस पर लहराता तिरंगा
फ़ोटो: Subhashish Panigrahi / विकिमीडिया कॉमन्स (CC BY-SA 4.0)

सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को 2,000 रुपये से अधिक के कुछ व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) UPI भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की नई व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। इससे यह व्यवस्था तय समय पर 15 अक्टूबर से लागू होने का रास्ता साफ हो गया है। अदालत ने केंद्र सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से चार हफ्ते में जवाब मांगा है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ अधिवक्ता अंजन दत्ता की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में केंद्र की 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर को घोषित MDR ढांचे को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह शुल्क पर्याप्त कानूनी सुरक्षा, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना लाया गया है और कारोबारी इसका बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं।

अदालत में क्या दलीलें रखी गईं

PTI के अनुसार, केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमण ने कहा कि यह शुल्क न टैक्स है, न फीस, और सरकार को इसमें से एक भी रुपया नहीं मिलेगा। उन्होंने बताया कि करीब 96 प्रतिशत लेनदेन इसके दायरे से बाहर रहेंगे। पीठ ने पूछा कि अगर यह टैक्स या फीस नहीं है तो इसका कानूनी आधार क्या है। अदालत ने इसे कानूनी से ज्यादा तकनीकी मुद्दा बताते हुए केंद्र से सभी तथ्य हलफनामे में रखने को कहा।

किस भुगतान पर कितना शुल्क

नए ढांचे के तहत 2,000 रुपये से ऊपर के तय P2M भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत MDR लगेगा, जो 75,000 रुपये या उससे बड़े भुगतान पर अधिकतम 300 रुपये होगा। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसी जरूरी सेवाओं में 2,000 रुपये से ऊपर के भुगतान पर प्रति लेनदेन सिर्फ 5 रुपये का फ्लैट शुल्क होगा। म्यूचुअल फंड और शेयर ब्रोकरों को किए जाने वाले भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR लगेगा, जिसकी सीमा भी 300 रुपये है।

दोस्तों या परिवार को भेजे जाने वाले व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) ट्रांसफर किसी भी रकम पर पहले की तरह मुफ्त रहेंगे। 2,000 रुपये तक के व्यापारी भुगतान पर भी कोई MDR नहीं है। इसके अलावा QR कोड के जरिए हर महीने 1 लाख रुपये तक पाने वाले छोटे दुकानदारों पर भी शून्य MDR लागू रहेगा।

यह शुल्क व्यापारी को चुकाना होगा, ग्राहक को नहीं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 25 सितंबर को PTI से कहा था कि यह न टैक्स है, न सेस और न ही सरचार्ज, और यह रकम सरकार के पास नहीं जाएगी। उनके मुताबिक MDR का 40 प्रतिशत ग्राहक के बैंक, 30 प्रतिशत पेमेंट गेटवे, 20 प्रतिशत UPI ऐप और 10 प्रतिशत ऐप के स्पॉन्सर बैंक को मिलेगा।

इस फैसले को लेकर राय बंटी हुई है। भारतपे के पूर्व सह-संस्थापक अश्नीर ग्रोवर ने इसे पीछे ले जाने वाला कदम बताते हुए नकद लेनदेन बढ़ने की आशंका जताई थी, जबकि भारतपे ने 17 सितंबर को नए ढांचे का समर्थन करते हुए ग्रोवर के बयान से दूरी बना ली थी। अब मामले की अगली सुनवाई में केंद्र, RBI और NPCI के जवाब अहम होंगे।

फ़ोटो: Subhashish Panigrahi / विकिमीडिया कॉमन्स (CC BY-SA 4.0)

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