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जंतर-मंतर विवाद: महिला पत्रकार के आरोपों के बीच ACP विवेक भगत का एडिशनल DCP चार्ज रुका

जंतर-मंतर पर 3 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार से कथित बदसलूकी के आरोपों के बीच दिल्ली सरकार ने ACP विवेक भगत को एडिशनल DCP का करंट ड्यूटी चार्ज देने का आदेश उनके मामले में रोक दिया है। सरकार के मुताबिक, भगत ने खुद जांच पूरी होने तक यह चार्ज न लेने का अनुरोध किया था।

नई दिल्ली में सड़क किनारे रखा दिल्ली पुलिस का पीला बैरिकेड, जिस पर 'PS Parliament Street' लिखा है
प्रतीकात्मक तस्वीर। फ़ोटो: Sidheeq / विकिमीडिया कॉमन्स (CC BY-SA 3.0)

दिल्ली सरकार ने ACP विवेक भगत को एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (एडिशनल DCP) का करंट ड्यूटी चार्ज सौंपने वाले 5 अक्टूबर के आदेश को उनके मामले में संशोधित कर दिया है। भगत पर आरोप है कि 3 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान उन्होंने एक महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी की। सरकार का कहना है कि भगत ने स्वयं अनुरोध किया था कि जांच पूरी होने तक उन्हें यह चार्ज न दिया जाए।

3 अक्टूबर का यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में आयोजित किया गया था। इसके बाद तीन महिला पत्रकारों ने वहां ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। दिल्ली पुलिस ने X पर बताया कि नई दिल्ली जिले को मिली ये शिकायतें निष्पक्ष जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेज दी गई हैं।

समाचार एजेंसी PTI के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, इनमें से एक शिकायत में ACP विवेक भगत का नाम लिया गया है। शिकायत करने वाली पत्रकार का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाते समय मौके पर कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी, और जब उन्होंने इस बारे में अधिकारी से सवाल किया तो उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ और उन्हें पीछे धकेल दिया गया। FIR दर्ज करने की मांग को लेकर पत्रकारों ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर विरोध भी जताया। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने महिला प्रदर्शनकारियों से मारपीट के सोशल मीडिया दावों को निराधार बताते हुए कहा है कि हिरासत में ली गई महिलाओं को महिला स्टाफ ही संभालता है और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाता है।

प्रमोशन आदेश पर क्यों उठे सवाल

5 अक्टूबर के आदेश के तहत DANIPS कैडर के 12 अफसरों को एडिशनल DCP पद का करंट ड्यूटी चार्ज सौंपा गया था और इस सूची में विवेक भगत भी शामिल थे। आरोपों के दो दिन बाद आए इस आदेश को भगत की पदोन्नति माना गया और विपक्ष ने इस पर सवाल उठाए।

विवाद बढ़ने पर दिल्ली सरकार ने X पर अपना पक्ष रखा। सरकार के अनुसार, इन अफसरों को यह जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया 25 अगस्त को ही, यानी इस विवाद से काफी पहले, शुरू हो गई थी। सरकार के मुताबिक, करंट ड्यूटी चार्ज केवल अस्थायी इंतजाम होता है और इससे अधिकारी को कोई वित्तीय लाभ नहीं मिलता। सरकार ने यह भी बताया कि भगत ने अपनी मर्जी से अनुरोध किया है कि महिला पत्रकारों के कथित उत्पीड़न की जांच पूरी होकर संतोषजनक नतीजे तक पहुंचने से पहले वे यह चार्ज नहीं संभालेंगे। इसी आधार पर आदेश में बदलाव करके उसे बाकी 11 अधिकारियों के लिए नए सिरे से जारी किया जाएगा।

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, भगत ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में आग्रह किया है कि उन पर लगाए गए आरोपों की पहले जांच और पुष्टि हो, और तब तक उनकी पदोन्नति रोककर रखी जाए। फिलहाल वे ACP के पद पर ही बने रहेंगे। क्राइम ब्रांच इस मामले में शिकायतकर्ताओं और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज करेगी। शिकायत करने वाली पत्रकारों ने FIR दर्ज करने की मांग की है।

प्रतीकात्मक तस्वीर। फ़ोटो: Sidheeq / विकिमीडिया कॉमन्स (CC BY-SA 3.0)

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