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हेमकुंड साहिब के कपाट 10 अक्टूबर को होंगे बंद, इस साल 3.58 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित हेमकुंड साहिब के कपाट 10 अक्टूबर को आखिरी अरदास के बाद सर्दियों के लिए बंद होंगे। ट्रस्ट के मुताबिक इस यात्रा सत्र में 3.58 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।

बादलों से घिरे पहाड़ों के बीच झील के किनारे बना हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा और किनारे पर मौजूद श्रद्धालु
फ़ोटो: Japleenpasricha / विकिमीडिया कॉमन्स (CC BY-SA 4.0)

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित सिख आस्था के प्रमुख तीर्थ हेमकुंड साहिब के कपाट 10 अक्टूबर को सर्दियों के मौसम के लिए बंद होंगे। अमर उजाला की 2 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक उस दिन इस साल की आखिरी अरदास की जाएगी और उसके बाद कपाट बंद किए जाएंगे। यात्रा अब समापन की ओर है और कपाट बंद होने से पहले मत्था टेकने आ रहे श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ गई है।

हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के प्रबंधक सेवा सिंह ने बताया कि गुरुद्वारा प्रबंधन ने कपाट बंद करने से जुड़ी सारी तैयारियां कर ली हैं। उनके अनुसार इस यात्रा सत्र में 3.58 लाख से ज्यादा श्रद्धालु हेमकुंड साहिब में मत्था टेक चुके हैं और इस बार का आंकड़ा पिछले सभी सालों के रिकॉर्ड से आगे निकल गया है।

23 मई को खुले थे कपाट

इस वर्ष हेमकुंड साहिब की यात्रा 23 मई को विधि-विधान से शुरू हुई थी। ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने 10 अगस्त को ही कपाट बंद होने की तारीख घोषित कर दी थी। तब तक देश और विदेश से 2.38 लाख से अधिक श्रद्धालु धाम पहुंच चुके थे। बिंद्रा ने श्रद्धालुओं से कहा था कि वे तय तारीख से पहले अपनी यात्रा पूरी कर लें। उन्होंने यात्रा में सहयोग के लिए उत्तराखंड सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बलों, सेना, सेवादारों और संगत का धन्यवाद भी किया था।

दोनों आंकड़ों की तुलना करें तो 10 अगस्त से अक्टूबर की शुरुआत तक, यानी करीब सात हफ्तों में, लगभग 1.2 लाख और श्रद्धालु हेमकुंड साहिब पहुंचे।

हेमकुंड साहिब समुद्र तल से 15,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर है। यह गुरुद्वारा बर्फ से ढकी सात चोटियों और एक हिमानी झील के बीच बना है, और यहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पहाड़ी पैदल मार्ग से चढ़ाई करनी होती है। अगस्त में ट्रस्ट ने बताया था कि घाटी में कई तरह के फूल खिले हुए हैं, जिनमें ऊंचे हिमालयी इलाकों में मिलने वाला दुर्लभ ब्रह्मकमल भी शामिल है।

सर्दियों में यहां भारी बर्फबारी होती है और मौसम बेहद कठोर हो जाता है, जिससे यात्रा मार्ग पर आना-जाना सुरक्षित नहीं रहता। इसी कारण हर साल अक्टूबर में कपाट बंद कर दिए जाते हैं और अगले साल गर्मियों में मौसम ठीक होने पर यात्रा फिर शुरू होती है। इस सत्र में दर्शन की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं के पास 10 अक्टूबर तक का समय है।

फ़ोटो: Japleenpasricha / विकिमीडिया कॉमन्स (CC BY-SA 4.0)

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